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बेटीरोटी कि संबन्ध नेपाल भारतकि, चर्चा नहि संबन्ध है सदियो सनातम धर्मकी

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सिम्रौन्गढ़ नपा psa

बीरगंज ।

बेटीरोटी कि संबन्ध नेपाल भारतकि, चर्चा नहि संबन्ध है सदियो सनातम धर्मकी जो किसिके बनानेसे नहि परमात्मा ने बनाया है नकि मेरे और आपके बनानेसे बना है कि कोइ इसे तोडफोड दे। इसिलिए कोइ कितनाहु कोसिस करले लेकिन इस सम्बन्ध को को तोड्ना किसिकी बसकी बात नहि है। परापुर्व काल से यह चल्ता आया है और चल्ता रहेगा, भलेही गगरी एक आपसमे होनेपर बजता है, ठिक उसि तरह सम्बन्ध मे खटास आजये ये अलग बात है लेकिन सम्बन्ध टुट्ना सम्भव नहि है। इसि बातको सभि नक्ताओने आपनी अपनी बिचार क्रमिक रुपमे रखा था।

प्रसौनी गापा सामाजिक संदेश ०७८
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आदर्श कोतावल सामाजिक संदेश

भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित क्रॉस बॉर्डर जॉर्नलिस्ट मीट में  भारत  व नेपाल के मीडिया से संबंधित व्यक्तित्व ने शिरकत की  कार्यक्रम के स्वागत मंतव्य में एक्टिंग कौंसिल जनरल श्री रमेश पी चतुर्वेदी ने दो देशों के राजनीतिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विचारों में चाहे जितने मतभेद हो जाएं हमारे रिश्ते कभी कमजोर नहीं हो सकते । हम सदैव एक दूसरे के सुख दुख में साथ है।

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मुख्य वक्ता के रूप में प्रभात खबर के ब्यूरो चीफ ललित झा,  डॉ श्वेता दीप्ति, उपस्थित थी मुख्य वक्ता श्री ललित झा ने वैश्वीकरण के दौर में नेपाल भारत के संबंधों पर अपने विचार प्रस्तुत किए । श्री झा ने कहा की   वैश्वीकरण के इस दौर में कई बातें सुलझी है तो कई बातें उलझती भी जा रही है। नेपाल भारत के रिश्ते भी इससे अछूते नहीं हैं । एक तनाव हम महसूस कर रहे हैं बावजूद इसके यह सच है कि इन दोनों देशों का रिश्ता कभी टूट नहीं सकता ।

नेपाल भारत के रिश्तों में आए परिवर्तन को कैसे सुधारा जाय इस विषय पर एक माशिक पत्रिका की पत्रकार व संपादक डॉ श्वेता दीप्ति ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की जो बेटी रोटी का नारा आज तक दिया जा रहा है वह कल ऐसा न हो कि सिर्फ रोजी रोटी के नारे तक ही सीमित रह जाय। आज रिश्तों में जो अविश्वास पैदा हुआ है वह सदियों के इस रिश्ते को कठिन बना रहा है । जबकि जरूरत सहजता की है। बॉर्डर पर की परेशानियां, सुरक्षा के मद्देनजर बनाए गए कानून का आम आदमियों पर असर रिश्तों पर प्रभाव डाल रहा है ।

संधियों और सीमाओं को लेकर जो विवाद हैं उन्हें जल्द सुलझाने की जरूरत है क्योंकि यही तनाव का विषय बनता आया है । दुसरी बात यहभी कहि कि जितने नेपाली भारत मे पढाइ, नौकरी या किसि कार्योके सिलसिला मे जाताते है उनके सहजता हेतु भारत अभि कहि न कहि चुकरहाहै इस लिए सबसे पहले वैसे कार्योमे सहजताकी मदत होना जरुरी है। जैसे मे पहले भारतीय रुपियाँ का सटही काउन्टर, किसिभी बैंकमे खाता खुलवाना, कोइभी समान खरिद कर्नेमे बट्टाके तौरपे ठगेजाने वाले लोगोको सहजताकी जरुरत को मध्यनजरकी सवस्यक्तको देखनेकि बातपर जिक्र किया गया था।

चर्चाके क्रममे तसकरी, नसिली दवा या औरभी बहुतसारे बातोपर चर्चाहोनेके साथसाथ बहुत सारे छोटी-छोटी भन्सारनाकामे और भी कस्टम रखनेकी भी चर्चाकी गइथी।

वहीं आज तक के संपादक श्री सुजीत झा ने कहा कि नेपाल और भारत भौगोलिक दृष्टिकोण से इतने जुड़े हुए हैं कि चाह कर भी कोई तीसरी शक्ति इसे अलग नहीं कर सकती ।
तस्करी और अवैध व्यपार के कई कोणों पर डॉ एम ने विस्तार से चर्चा की और पत्रकारों की जिज्ञासाओं का जवाब दिया । कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विभिन्न समाचारपत्रों के रिपोर्टर्स ने अपनी बात रखी और सवाल भी किया जिसका डॉ एम ने विस्तार से जवाब दिया । कार्यक्रम का सफल संचालन श्री सुरेश कुमार ने किया । कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागीको प्रतीक चिन्ह के साथ सम्मान किया गया ।

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